शब्दरेखा, शिमला
विकास थापटा
शिमला।
शिमला शहर में बाहर से लोग सकून की तलाश में आते हैं। पर्यटक यहां सुख ढूंढते हैं। वे हर दर्शनीय स्थलों में जाते हैं। हिमाचल को देवभूमि कहा जाता है। इसकी राजधानी शिमला है तो स्वाभाविक है कि धार्मिक स्वभाव के पर्यटक यहां मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों और चर्चाें में भी जाते हैं। शिमला में बहुत से मंदिर हैं। इनमें कालीबाड़ी, जाखू, संकटमोचन, तारा देवी, ढींगू माता जैसे मंदिर प्रमुख हैं। इनमें भीड़भाड़ रहती है। पर कुछ मंदिर ऐसे भी हैं, जो शहर के किसी कोेने में हैं। इनमें आजकल कोरोना काल में तो बहुत कम श्रद्धालु जाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर शिमला शहर के उपनगर संजौली से नीचे इंजनघर के निकट सांगटी में है। शहर में दो सांगटी हैं। एक समरहिल में है। मगर यहां संजौली के सांगटी की बात हो रही है जहां बाबा बालकनाथ का मंदिर है।
यहां पर सिद्ध बाबा बालकनाथ, भगवान शिव, मां दुर्गा और शनिदेव की स्थापनाएं हैं। इस मंदिर को दो विधवा महिलाओं ने स्थापित किया था। नब्बे के दशक में शनान गांव की रहने वाली शकुंतला देवी ने यहां पर बाबा बालक नाथ के मंदिर की स्थापना की तो सांगटी में रहने वाली स्वर्गीय कलावती ने यहां शिवालय का निर्माण किया। यहां सुबह-शाम बाबा बालकनाथ की धूनी जलती रहती है। कोरोना काल में जबसे मंदिरों में आवाजाही बंद हुई, तबसे यहां लोगों का आना-जाना कम था। अब कुछ शर्तों के साथ मंदिर खोले गए हैं तो यहां गिने-चुने लोग जाते हैं और सकून महसूस करते हैं। मंदिर परिसर में रहने वाले पंडित विनोद शर्मा का कहना है कि एक वक्त ऐसा था कि यहां एक दिन में दो से तीन हजार लोग आते थे। विशेषकर जब यहां पर भंडारा होता था। अब भंडारे तो बंद हैं, मगर हर रविवार को यहां बाबा बालकनाथ पर रोट चढ़ता हैै। इसके लिए मंदिर कमेटी के लोग जुटते हैं। हालांकि आम श्रद्धालु कम आते हैं, मगर विषहरण के लिए यहां पर बड़ी संख्या में लोग आते हैं। धूनी से निकली विभूति से ही विष का दोष दूर हो जाता है। लोग संतान प्राप्ति की इच्छा से भी यहां आते हैं और उन्हें लाभ हो रहा है।
मंदिर कमेटी के चेयरमैन चरणजीव सूद और प्रबंधक माड़ूराम का कहना है कि यह मंदिर प्रशासन की अनदेखी का शिकार हो गया है। यहां पर न करते-करते मंदिर की ओर शौचालय बनाया गया है। इससे श्रद्धालुओं में भी नाराजगी है। इसे अन्यत्र बनाया जा सकता था। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस मंदिर के सौंदर्यीकरण में मदद करनी चाहिए।
हिंदी में शांति प्रार्थना ऐसे करें
- विनोद शर्मा, बाबा बालक नाथ मंदिर सांगटी
द्युलोक पृथ्वी, विस्तृत समस्त ब्रह्मांड, समुद्री जल और औषधियां ये सब हमारे कर्म तथा प्रकृति से उत्पन्न होने वाले अनिष्टो का निवारण करके हमारे लिये सुख शांति प्रदान करे। पूर्व जन्म में किए गए कर्म हमारे लिये शांति प्रदायक हों। हमारे द्वारा संपन्न किए गए और न किए गए कार्य भी शांति प्रदान करें। बीता कल व आने वाला कल दोनों शांति प्रदायक सिद्ध हों। सभी कर्म हमें शांति और सुख प्रदान करें। परम पद पर विराजमान एवं तेजस्वी ज्ञान से देदीप्यमान जो वाणी की देवी सरस्वती हैं। वे हमारे द्वारा दूसरों के प्रति बोले गए अपशब्दों के दोष से हमे मुक्त करें तथा हमारे लिए शांति प्रदान करने वाली सिद्ध हों। यह जो परम स्थान में विराजमान और ज्ञान से देदीप्यमान इस जगत का मूल कारण मन है, यदि इसके द्वारा दुष्कर्म की उत्पत्ति हुई हो तो यही हमारे द्वारा किए गए बुरे कर्मों के प्रभाव को शांति प्रदान करें। चेतना द्वारा संचालित मन के साथ जो पांच ज्ञान इंद्रियां हमारे हृदय में वास करती हैं, उनसे यदि अपराध कर्म बन पड़ा हो तो उनके द्वारा रचित उस दुष्कर्म की हमारे प्रति शांति हो। दिन के अधिष्ठाता देवता सूर्य, रात्रि के चंद्र, पालनकर्ता विष्णु, प्रजा के पालक प्रजापति, परम वैभव युक्त इंद्र देव, गुरु तथा अर्यमा, ये सभी देवता हमे शांति प्रदान करे। पृथ्वी और अंतरिक्ष लोक में होने वाले उत्पात और द्यूलोक में विचरण शील सभी ग्रह हमारे दोष का निदान करके हमारे लिये शांतिप्रद सिद्ध हों।एकादश रुद्र, आठ वसु, बारह सूर्य, अग्नि, सप्त ऋषि, ये सभी हमारे लिए शांति प्रदायक सिद्ध हों।